Wo Lahme

1.बचपन में कभी न कभी टीचर से बचने के लिए आपने भी मारे होंगे ये बहाने

याद है न वो लम्हे जो हमने स्कूल और कॉलेज में अपने दोस्तों के साथ मौज़ मस्ती में बिताए थे? उन दिनों आपने भी अपने टीचर से बचने के लिए कई बहाने मारे होंगे। क्योंकि जब आपका होमवर्क पूरा नहीं होता था या फ़िर पकाऊ टीचर की क्लास से बच कर निकलना होता था,                                                                       Read More                                                                            
2.मुझको लौटा दो बचपन का सावन वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी बड़ी खूबसूरत थी वो ज़िंदगानी ....Part 1


लोगो को तन्हाइयों  में सबसे अधिक क्या याद आता है-दोस्त ,बचपन के पल और अपनी ही शैतानियाँ 

जितने छोटे थे हम उतने ही बड़े हमारे सपने थे . ये भी करना है वो भी करना है ,
जाने कितने ही ख्वाबों के बीच घिरे रहते थे । वो बचपन और स्कूल के दिन, जब अपने वजन से भारी बस्ता उठाने पर भी हमारे कदम आकाश पर ही पड़ते थे , और अपनी धुन में गम हम जाने कब स्कूल से घर आ जाते थे । शैतानियाँ और माँ की दांत दोनों ही बड़ी प्यारी लगा करती थी और दोनों का सुख भी एक साथ ही मिल जाता था इसलिए हम शैतानियाँ करने से बाज नही आते थे                                                                                            Read More

3.मुझको लौटा दो बचपन का सावन वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी बड़ी खूबसूरत थी वो ज़िंदगानी ....Part-2
बचपन वाली आइसक्रीम,
ना जाने कैसे पिघल गई,
खिलोने टूटने की क्रिया,
दिल टूटने में बदल गई ,

किताबो वाले फूल सभी,
ना जाने कब के सूख गए,
प्यारे प्यारे दोस्त सभी,
                                  ना जाने किस बात पे रूठ गए,               Read More

4. MAGIC MOMENT OF STUDENT LIFE.......

बचपन के बाद  जीवन का दूसरा पड़ाव होता है student life जो सबका अलग अलग होता है

कोई हर पल मस्ती में जीता है तो कोई उदास दुख भरा मर -मर  जीता है ।
छात्र जीवन  में काफी मुस्किले आती है  जैसे-कभी पढ़ने मन नहीं करता ,जब बड़ी मुश्किल से मन लगता तो को  कोई(Best Friends) पढ़ने नहीं देता, पढने के टाइम ही दुनिया की सारी बाते याद,कभी किसी काम में मन नहीं लगता है।
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4.वो लम्हें...वो यादें ...

आज ये मैं ​इसीलिए लिख रहा हूं ताकि आपकी वो दोस्ती दोबारा जी उठे. बस आपको नीचे लिखी पंक्तियों में अपने उस दोस्त को खोजना है और फिर असल ज़िन्दगी में.
हो सके तो आपने उस दोस्त को Facebook पर खोज कर या फोन करके बता दें कि नहीं आप ​इस दुनिया से लुप्त नहीं हुए है और न ही उसे भूले हैं. विश्वास मानिए इससे आपको भी अच्छा लगेगा और उसे भी.
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